मटर खाने से कम लगती है उम्र

मटर खाने से कम लगती है उम्र

 

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ज्यादातर लोगों को मटर खाना पसंद नहीं होता। उन्हें लगता है कि मटर गरीबों का खाना है। लेकिन मटर बाकी दूसरी सब्जियों की तरह ही पौष्टिकता से भरपूर होती है। आज हम आपको मटर के फायदों के बारे में बता रहे हैं। आजकल मटर किसी भी सीज़न में मिल जाता है।

वज़न कंट्रोल रहता है

अगर आपको वजन कंट्रोल करना है तो खाने में मटर शामिल करें। एक कप मटर में 100 कैलोरी होती है, लेकिन इसमें फाइबर और प्रोटीन अधिक होती है।

2- पेट के कैंसर से बचाव

3-एंटी-एजिंग, स्ट्रॉन्ग इम्यून सिस्टम और हाई एनर्जी लेवल

4-पोलिफेनोल्स-कॉमेस्ट्रॉल

5-दिल के लिए लाभ

6- कब्ज दूर करने के लिए

7-हेल्दी बोन

8-गंदे कोलेस्ट्रॉल को कम करना

9- भूलने की बीमारी को कम करना

10- हमेशा जवां रखे

सर्फ फैशन के लिए नहीं होते सनग्लासेजः

सर्फ फैशन के लिए नहीं होते सनग्लासेजः

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भारत में किसी भी सामान्य व्यक्ति से पूछिए कि आप सनग्लासेज क्यों लगाते हैं, तो अधिकतर का जवाब होगा, अपने व्यक्तित्व को ग्लैमरस बनाने के लिए। अधिकतर लोग इसे गर्मियों के दिनों में लगाते हैं, लेकिन इसकी जरूरत के हर समय के बारे में जानकारी नहीं रखते। बेहद कम लोगों को यह जानकरी होगी कि सनग्लासेज सूरज की हानिकारक अल्टृावायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। आंखों को होने वाली लाॅंग टर्म समस्याएं जैसे कि मैक्युलर डीजनरेशन और मोतियाबिंद का संबंध सूरज की किरणों के लगातार संपर्क से भी होता है। सनबर्न से होने वाली एक अन्य समस्या भी बेहद आम है, जिसे फोटोकेराटाइटिस कहते हैं। इतना ही नहीं, कई प्रकार के जानलेवा कैंसर का संबंध भी यूवी किरणों से होता है। यूवी किरणों से 100 फीसदी सुरक्षा देने वाली क्रांतिकारी पोलराइज्ड तकनीक वाले सनग्लासेज बनाने वाली कंपनी मौउ जिम ने फिनिक्स माॅल में एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया, जिसमें लोगों को बताया गया कि किस तरह से सनग्लासेज उनकी आंखों को खतरनाक किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस बहु-क्रियाकलापों वाले सत्र का आयोजन गांगर आॅप्टीशियन के साथ मिलकर किया गया था। यह 25 दिसंबर से 28 दिसंबर तक चार दिनों तक चलाया गया। मौउ जिम इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री आई रहमतुल्ला कहते हैं, ’’सूरज की खतरनाक यूवी किरणें न सिर्फ त्वचा को बल्कि आंखों को भी नुकसान पुहंचाती हैं। लंबे समय तक लगातार इसका एक्सपोजर होने पर आपकी आंखों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। अल्टृावायलेट किरणें जिन्हें यूीवए और यूवीबी कहते हैं, में आपकी आंखों की रेटिना और काॅर्निया को नुकसान पहुंचाने की क्षमता होती है। बावजूद इसके भारत में लोग सनस्क्रीन की जरूरत को लेकर तो जागरूक हैं, मगर सनग्लासेज की जरूरत को लेकर नहीं। इतना ही नहीं, सनग्लासेज लगाने वाले लोग भी इस बात की ओर शायद ही ध्यान देते हैं कि उनके सनग्लासेज यूवी किरणों से सुरक्षा देने में सक्षम हैं भी या नहीं। हमारे इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को इसी संबंध में जागरूक करना था।’’

सनग्लासेज को लेकर दूसरी जो सबसे बड़ी भ्रामक  धारणा है, वह यह है कि सनग्लासेज सिर्फ गर्मियों में इस्तेमाल होने वाली एक्सेसरीज हैं। सूरज की रोशनी ठंड के दिनों में भले थोड़ी कम तीखी हो सकती है लेकिन इसकी यूवी किरणें हर मौसम में उतनी ही असरदार होती हैं। सत्र के दौरानत् लोगों ने मौउ जिम के विशेषज्ञों के साथ बातचीत की और आंखों की सुरक्षा से संबंधित अपने सवालों के जवाब पूछे। उन्हें आंखों की सुरक्षा वाले उत्पादों के बारे में भी बताया गया और आंखों के लिए परामर्श भी दिए गए।

मौउ जिम के सनग्लोसज प्रेस्क्रिप्शन में भी उपलब्ध हैं, ऐसे में उन लोगों को भी बाहर निकलते समय

सनग्लासेज लगाने की सुविधा मिल सकती है, जिनकी आंखों में पाॅवर वाले चश्मे लगे हैं। क्योंकि सूरज की किरणें आपकी आंखों पर विभिन्न कोणों से पहुंचती हैं, ऐसे में मौउ जिम के लेंस ऐसी तकनीक के इस्तेमाल से बलाए जाते हैं जो आपको हर तरफ से पूरी सुरक्षा प्रदान करें। इसका पोलराइजेशन फिल्टर 99.9 फीसदी रिफ्लेक्टेड चमक को सोखता है, एक बाई-ग्लेयर मिरर सभी प्रत्यक्ष किरणों को रिफ्लेक्ट करता है और एंटी-रिफ्लेक्शन टृीटमेंट बाउंस-बैक होने वाली चमक को पकड़ लेता है।

प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन का आयोजन

प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन का आयोजन

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दिल्ली का शाह ऑडिटोरियम सिविल लाइन्स में 6 दिसंबर 2014 को प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन ने एक ध्यान का आयोजन किया. इसका उदेश्‍य था लोगों को ध्यान और हीलिंग के बारे में अनुभव कराना.

50  प्राणिक हीलर्स की टीम अत्यंत उत्साह और प्यार से लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार थी. एक ओर रजिस्ट्रेशन टेबल और दूसरी ओर विश बॉक्‍स की टेबल लगी थी जहां  लोग अपनी विशेज लिख कर उसमें डाल रहे थे. बहुत ही खुशनुमा माहौल था और लोगों के लिए ये एक नया अनुभव था.  लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था.

प्रोग्राम की शुरुआत एक संदेष से हुई जिसका उदेश्‍य  था कि आप जब भी तनाव में हो और अपने आप को हल्का अनुभव करना हो तो ‘‘लोगों को माफ कर दें और उनसे माफी मांग लें;

इसके बाद दिल्ली की मैनेजिंग ट्रस्टी निधि ने लागों को फाॅरगिवनेस का जीवन में महत्व बताया और साथ ही प्राणिक हीलिंग की ट्विन हार्ट मेडिटेशन को करने के लिए संक्षेप में जानकारी दी. ध्यान के दौरान लोगों को बहुत अच्छे अनुभव हुए जो उन्होंने सबके साथ शेयर किए. किसी को ऊर्जा की अनुभूति हुई तो किसी को अपने अंदर प्रकाश दिखाई दिया.

आॅडिटोरियम से बाहर फ्री हीलिंग कैंप था. लोगों के लिए ये बहुत सुखद अनुभव था कि कैसे हीलर सिर्फ अपने हाथों से स्कैनिंग करके ही लोगों को उनके शरीर की बीमारियों के बारे में कैसे बता सकते हैं.

ज्यादातर लोगों का एक कॉमन प्रश्‍न  था कि क्या इससे कोई भी सीख सकता है या सिर्फ इसके जानकार ही इसे कर सकते हैं

इसका जवाब है, हां इससे कोई भी सीख कर अपना तथा अपने परिवार का भला कर सकता है. साथ ही आप इसे एक प्रोफेशन की  तरह भी अपना सकते हैं और घर बैठे कमा सकते हैं. ज्यादा जानकारी के लिए 98100088775 और 9818007334 पर संपर्क कर सकते हैं.

जल्दी पीरियड तो जल्दी मीनोपोज

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पिछले कुछ महीनों से सरिता एक अजीब तरह की बेचैनी महसूस कर रही थी; उसे न भूख लगती न ही कहीं जाने की इच्‍छा होती; आधी रात को पसीने से तर हो जाती और नींद खुद जाती थी; यही नहीं पिछले महीने उसे पीरियडस भी नहीं आया। सोची टेशन से ऐसा हो रहा हो लेकिन जब बहुत दिनों तक तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो पहुंची गाइनोकोलोजिस्‍ट के पास; गायनीकोलोजिस्‍ट ने जो बताया वह सुनकर उसके होश उड् गए; डॉक्‍टर ने कहा कि आपका मीनोपोज शुरू हो गया है; लेकिन सरिता ने कहा कि मेरी उम्र तो अभी 38 साल है अभी कैसे हो सकता है; डॉक्‍टर ने जो बात बताई वह कुछ इस प्रकार थी;

मीनोपोज की कोई सही उम्र नहीं है. कुछ महिलाओं को इसका सामना 40 की उम्र में करना पड़ता है तो कुछ को 48 की उम्र में. अब आप यह सोच रहे होंगे कि इतना अंतर क्यों? हाल ही में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि कम उम्र में लड़कियों को पहला पीरियड आना जल्दी  मीनोपोज का संकेत है. क्योंकि अगर 12 या 13 की उम्र में पीरियड आता है तो इस स्थिति में ओवरी में अंडा बनना 40 साल के पहले बंद हो जाता है. इसलिए शोधकर्ताओं को कहना है कि लड़कियों की शादी करते हुए इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए जिससे कि बढ़ती इनफर्टिलिटी को रोका जा सके.

डाॅक्टर एमी सेठ का कहना है कि अक्सर महिलाओं को इस बात का अहसास ही नहीं होता कि 30 की उम्र से पहले ही प्रजनना क्षमता में कमी आना आरंभ हो जाता है. कई महिलाएं मानती हैं कि प्रजनन क्षमता में गिरावट 40 साल के आस-पास होना आरंभ होती है लेकिन आजकल इसकी औसत उम्र 35 साल हो गई है. हेल्दी लड़कियों की बाॅडी में आरंभ से ही सभी एग मौजूद होते हैं जब लड़़की यंग एज में आती हैं तो पीरियड आरंभ हो जाते हैं. प्रेगनेंट होने की सही उम्र हमारी दादी नानी का हमेशा से ही यही कहना होता है कि हर इंसान के लिए शादी करने की एक सही उम्र होती है. वैसे काफी हद तक यह अनुवांषिक होता है. आज की भाग दौड भरी जिंदगी और अपने कैरियर को प्राथमिकता देने वाली लड़कियों का 30 की उम्र के बाद शादी करना एक आम बात हो चुकी है. देर से शादी मतलब देर से गर्भधारण और देर से गर्भधारण मतलब मां और बच्चे दोनों को खतरा. गर्भधारण कब होना चाहिए और इसके लिए सही उम्र क्या है, हम आज इसी विषय पर बात करेगें.

प्रेगनेंट होने की सही उम्र 

वैसे तो गर्भधारण करने की सही उम्र का कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता पर कम से कम 30 की उम्र से पहले गर्भधारण कर लेना चाहिए, क्योंकि 35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने का मौका कम हो जाता है. यह भी कहा जाता है कि देर से प्रेगनेंसी बच्चे में कई तरह की कमियां विकसित कर सकती है. जो महिलाएं 35 के बाद या 18 साल की उम्र से पहले गर्भधारण करती हैं उनके बच्चे मानसिक रूप से कमजोर होते हैं. साथ ही ऐसे बच्चे सामान्य पैदा हुए बच्चों के मुकाबले शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर होते हैं. अगर लड़की की शादी जल्दी हो गई है यानी की 21 साल, तब युगल को मिल कर 27 या 30 की उम्र के पहले ही बच्चे को जन्म देने की सोच लेनी चाहिए.

 

 

प्रधानमंत्री मोदी की अंदर की खबर

प्रधानमंत्री मोदी की अंदर की खबर

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मोदी के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वो महज चार घंटे की ही नींद लिया करते हैं और वो दिन के बाकी घंटों में काम करना पसंद करते हैं। मोदी सुबह से लेकर रात तक खबरों को ही नियमित तौर पर देखना पसंद करते हैं।

साल 2002 के दंगों के बाद से ही नरेंद्र मोदी के मीडिया के साथ रिश्ते काफी अहम रहे हैं। मोदी के करीबी लोगों के मुताबिक जब मोदी अपने साउथ ब्लॉक स्थित आवास पर होते हैं तो वो रात में 10 से 12 के बीच एक निजी चैनल पर न्यूज स्टूडियो में होने वाली बहसों को जरूर सुनते हैं। हालांकि इस बात की जानकारी बेहद कम लोगों को ही है कि वो किस चैनल को ज्यादा देखते हैं। वहीं मोदी अपने डायनिंग टेबल पर भी अपनी रुचि के मुताबिक चैनलों की अदला बदली करते रहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिन की शुरुआत भी खबरों के साथ होती है। मोदी हर रोज सुबह काफी सारे अखबारों को स्कैन करते हैं और सरकार द्वारा मुहैया कराए गई खबरों को भी देखना नहीं भूलते हैं। जब मोदी सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री थे वो तब सिर्फ गुजरात संबंधित मुद्दों पर नजर रखने के लिए गुजराती अखबारों को नियमित तौर पर देखा करते थे, लेकिन वो अब तमाम अंग्रेजी अखबारों को भी पढ़ते हैं।

मोदी की जीवनी पर काम कर रहीं निकिता परमार बताती हैं, ‘इतिहास और राजनीतिक विज्ञान पर अपनी पकड़ को और धारदार बनाने के लिए भी मोदी अपने पसंदीदा विषयों की किताबों का ऑर्डर करते रहते हैं। जब मोदी युवा छात्र थे वो तब भी वडनगर की लाइब्रेरी में नियमित तौर पर जाया करते थे। इसलिए पढ़ाई लिखाई उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। देश की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन भारत का इतिहास पढ़ना भी उन्हें अच्छा लगता है।’

मोदी सुबह चार बजे ही बिस्तर छोड़ देते हैं और उसके बाद वो फिर रात को ही बिस्तर पर लेटना पसंद करते हैं। मोदी जब देश में होते हैं तो गंभीर विषयों पर पढ़ने का मौका उन्हें कम ही मिल पाता है ऐसे में वो जब विदेशी दौरे के लिए फ्लाइट में होते हैं तो वो उस वक्त का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। मोदी ने 180 दिनों के अपने कार्यकाल में 31 दिन सिर्फ हवाई यात्रा में ही बिताए हैं।

मोदी पर किताब लिखने वाले सुदेश वर्मा बताते हैं कि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वो अपने गांधीनगर स्थित आवास में भी अपनी पुरानी परंपरा के मुताबिक अल सुबह में उठा करते थे। एक सूत्र के मुताबिक उन्हें रेस कोर्स रोड़ पर चहलकदमी करना भी खूब पसंद है लेकिन वो व्यस्तताओं के चलते ऐसा मुश्किल से कर पाते हैं। लेकिन वो योगा, सूर्य नमस्कार और ध्यान लगाने की अपनी पुरानी आदत को कभी नहीं भूलते हैं। नरेंद्र मोदी सुबह हल्के फुल्के नाश्ते के साथ अदरक वाली चाय पीना पसंद करते हैं।

खाने के शौकीन मोदी अपने खाने से पहले स्नैक लेना पसंद करते हैं। हालांकि मोदी बेहद कम खाते हैं लेकिन वो ज्यादातर गुजराती और उत्तर भारतीय व्यंजन जैसे कि खिचड़ी, कढ़ी, उपमा, खाकरा खाना पसंद करते हैं जिसे खुद उनका कुक बद्री मीना तैयार करता है। जानकार बताते हैं कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी चाय के साथ बिस्कुट लेना पसंद करते थे, लेकिन मोदी बिस्कुट की अपनी पसंद को लेकर जरा भी चूजी नहीं हैं।

देश के नए प्रधानमंत्री पशु प्रेमी भी हैं। इस बात का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उनके कार्यालय में काफी सारे ऐसे चित्र टंगे थे जिसमें मोदी को कुत्तों को बिस्कुट खिलाते और उनके साथ खेलते हुए दिखाया गया है। मोदी पशु और पक्षियों के बेहद करीबी हैं और वो अपने दिन का कुछ समय कुत्तों, मोरों, बतखों और कबूतरों को दिया करते हैं।

डी- स्ट्रेस करता फोर फाउंटेंस

डी- स्ट्रेस करता फोर फाउंटेंस

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स्‍पा  का कॉसेप्‍ट अब पुराना हो गया इसलिए फोर फाउंटेंस लेकर आया है नया कॉसेप्‍ट. फोर फाउंटेंस न सिर्फ ब्यूटीफिकेशन करता है बल्कि यह डी- स्ट्रेस भी करता है. क्योंकि इनका मानना है कि जब तक आपका शरीर डी- स्ट्रेस नहीं होता कोई भी मेकअप आपको खूबसूरत नहीं बना सकता. फोर फाउंटेंस की बिजनेस पार्टनर रिंपी जिंदल का कहना है कि हमारे स्पा का कॉसेप्‍ट दूसरे स्पा सेंटर से बिल्कुल अलग है. हमारे यहां स्पा के अलग अलग पैकेज हैं. हर पैकेज में अलग अलग सुविधाएं हैं जैसे-वेडिंग पैकेज के तहत हम पहले स्पा के माध्यम से व्यक्ति को डी-स्ट्रेस करते हैं. इसके बाद थाई मसाज होता है इसके बाद ब्यूटीफिकेषन किया जाता है. इस स्पा के बाद जो निखार आता है वह आंतरिक होती है. इन दिनों वेडिंग पैकेज काफी डिमांड में है. यही नहीं इनके ऑरगैनिक उबटन की भी काफी डिमांड है क्योंकि यह उबटन हर्बस से बनते हैं जो स्किन की नरशिंग करते हैं.

इसके अलावे फोर फाउंटेंस का मोबाइल स्पा को भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं. क्योंकि मोबाइल स्पा आपके शादी समारोह को यादगार बनाने में काफी मददगार है. आप अपने घर में हो रहे षादी  समारोह में स्पा की सुविधा चाहते हैं तो इन्हें काॅल करें. ये आपके घर आकर आपको स्पा सेंटर की तरह सुविधाएं प्रदान करेंगे. इससे आप ही नहीं बल्कि आपके मेहमानों की भी थकान भी उतर जाएगी.

डी- स्ट्रेस करता फोर फाउंटेंस

डी- स्ट्रेस करता फोर फाउंटेंस

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स्‍पा का काॅसेप्ट अब पुराना हो गया इसलिए फोर फाउंटंेस लेकर आया है नया काॅसेप्ट. फोर फाउंटेंस  न सिर्फ ब्यूटीफिकेषन करता है बल्कि यह डी- स्ट्रेस भी करता है. क्योंकि इनका मानना है कि जब तक आपका शरीर डी- स्ट्रेस नहीं होता कोई भी मेकअप आपको खूबसूरत नहीं बना सकता. फोर फाउंटेंस   की बिजनेस पार्टनर रिंपी जिंदल का कहना है कि हमारे स्पा का काॅसेप्ट दूसरे स्पा सेंटर से बिल्कुल अलग है. हमारे यहां स्पा के अलग अलग पैकेज हैं. हर पैकेज में अलग अलग सुविधाएं हैं जैसे-वेडिंग पैकेज के तहत हम पहले स्पा के माध्यम से व्यक्ति को डी-स्ट्रेस करते हैं. इसके बाद थाई मसाज होता है इसके बाद ब्यूटीफिकेशन किया जाता है. इस स्पा के बाद जो निखार आता है वह आंतरिक होती है. इन दिनों वेडिंग पैकेज काफी डिमांड में है. यही नहीं इनके आॅरगैनिक उबटन की भी काफी डिमांड है क्योंकि यह उबटन हर्बस से बनते हैं जो स्किन की नरशिंग करते हैं.
इसके अलावे फोर फाउंटेंस का मोबाइल स्पा को भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं. क्योंकि मोबाइल स्पा आपके शादी समारोह को यादगार बनाने में काफी मददगार है. आप अपने घर में हो रहे शादी समारोह में स्पा की सुविधा चाहते हैं तो इन्हें काॅल करें. ये आपके घर आकर आपको स्पा सेंटर की तरह सुविधाएं प्रदान करेंगे. इससे आप ही नहीं बल्कि आपके मेहमानों की भी थकान भी उतर जाएगी.

प्राणिक हीलिंग अपनाकर खुद बनें डॉक्‍टर

प्राणिक हीलिंग अपनाकर खुद बनें डॉक्‍टर

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प्राणिक का अर्थ प्राण और हिलिंग का मतलब उपचार है. इसमें न किसी तरह की दवा दी जाती है न ही छूकर इलाज किया जाता है. हमारे षरीर के चारों तरफ एक ‘औरा’ यानी कि आभामंडल होता है.  बीमारियों पहले औरा में प्रवेष करती हैं. उसके बाद हमारी बॉडी में पहुंचती हैं. प्राणिक हीलिंग में दूषित या निगेटिव एनर्जी को निकालकर  ताजी एनर्जी डाला जाता है. इससे रोगी तुरंत ही स्वस्थ और अच्छा अनुभव करने लगते हैं. प्राचीन समय में इस तरह की नॉलेज को बहुत ही गुप्त रखा जाता था लेकिन प्राणिक हिलिंग के फाउंडर मास्टर चोआ कॉक सुई ने इसके बारे में दुनिया को बताया. इलाज करा चुके लोगों का कहना है कि यह बहुत ही चमत्कारी उपचार है जिसमे सभी बीमारियों जैसे सिरदर्द, एसिडिटी, बॉडीपेन और मानसिक बीमारियों को आसानी से ठीक कर सकते हैं. यही नहीं पत्नी या पति के बिगड़े मूड को चुटकियों में ठीक कर सकते हैं. सुनने में यह बहुत अटपटा सा जरुर लगता है लेकिन यह बिलकुल सच है. आप आजमा कर देखेंगे तभी इस पर विश्‍वास कर सकेगें. भारत के सभी बड़े शहरों में प्राणिक हीलिंग के सदस्य हैं जहां से इसको सीखा जा सकता है. इसका पहला बेसिक कोर्स दो दिन का होता है. लेकिन यदि इसमें मास्टरी हासिल करनी है तो आपको पांच कोर्सेज करने होंगें. इनको करके कंपलीट हीलर बन जाते हैं. प्राणिक हीलिंग को अपना कर पॉजि‍टीव बनें और पॉजीटिवीटी फैलाएं.

अगर आप फायदा उठाना चाहते हैं तो दिल्‍ली के शॉह ऑडिटोरियम , सिविल लाइंस में 6 दिसंबर को 12 से 3 बजे तक इसका आयोजन किया जा रहा है; कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए किसी तरह का शुल्‍क नहीं लगेगा; विशेष जानकारी के लिए आप मनो‍रमा शरिया से 9818007334 पर संपर्क कर सकते हैं;

बुलेटप्रूफ कॉफी पीने से शरीर की चर्बी होती है कम

बुलेटप्रूफ कॉफी पीने से  चर्बी होती है कम

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अगर आप कॉफी के शौकीन हैं और अपनी सेहत के लिए भी फिक्रमंद रहते हैं तो यह खबर आपके लिए है. अमेरिका में इन दिनों कॉफी के मुरीद लोगों की पहली पसंद बुलेटप्रूफ कॉफी बनी हुई है. बुलेटप्रूफ कॉफी को पीने से कमर की चर्बी घटती है और दिमाग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है.

बुलेटप्रूफ कॉफी को बनाना भी बेहद आसान है. इस कॉफी को बनाने के लिए ऑर्गेनिक एस्प्रेसो में थोड़ा सा शुद्ध घी, नारियल का तेल, वनिला एसेंस और चीनी मिलाने से कॉफी तैयार हो जाती है. बुलेटप्रूफ कॉफी सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ स्वादिष्ट भी होती है.

सेक्स के 10 पॉपुलर मिथ

सेक्स के 10 पॉपुलर मिथ

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पहला मिथ – लिंग और मोजे/कान/हाथ की लंबाई में संबंध होता है.

कैरोल का तर्क है कि ऐसा कुछ भी नहीं है. इस पर बहुत सारे अध्ययन हो चुके हैं. और यह पूरी तरह तर्कहीन है.

 दूसरा मिथ – पुरुषों के लिंग की लंबाई 7 इंच होती है.

कैरोल के मुताबिक ईमानदारी से कहा जाए तो औसत रूप से पुरुषों के लिंग की लंबाई 5 इंच होती है. इंडियाना के एक संस्थान द्वारा 1600 पुरुषों के बीच किए सर्वे में यह रिजल्ट 5.6 इंच रहा.

तीसरा मिथ – कंडोम पहनना, सेक्स की टाइमिंग को घटा देता है.

कैरोल का कहना है कि कंडोम पहनने से सेक्स के समय में कोई अंतर नहीं आता.

चौथा मिथ – ज्यादा सेक्स से स्पर्म बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.

कैरोल ने 2005 में हुए एक शोध का उदाहरण देते हुए कहा, 6 हजार लोगों से लिए गए 9500 सैंपल पर आधारित शोध के मुताबिक हफ्ते में एक बार सेक्स करने वाले लोगों का औसत रहा 3.7 मिलीलीटर, जबकि सेक्स करने से पहले दिन सेक्स किए हुए लोगों का औसत रहा 2.3 मिलीलीटर. जबकि सेक्स करने के बाद उसी दिन सेक्स करने वाले लोगों का औसत रहा 2.4 मिलीलीटर.

 पांचवां मिथ – पुरुष ज्यादातर गोरी स्त्री को पसंद करते है, जिसके बाल काले हों, बजाय भूरे बालों वाली के.

कैरोल का तर्क है कि यह बिल्कुल क्षेत्र या इलाके पर निर्भर करता है. इस बारे में कोई स्पष्ट रुझान नहीं है.

छठा मिथ – ज्यादातर महिलाएं हेयरलेस नहीं होती.

कैरोल कहते हैं, ‘2 हजार से ज्यादा महिलाओं पर किए गए सर्वे के मुताबिक 11 प्रतिशत महिलाओं ने ज्यादातर समय अपने बाल साफ रखे. जबकि 20 प्रतिशत महिलाओं ने अपने बाल साफ नहीं किए. वहीं, 25 प्रतिशत ने कुछ समय अपने प्यूबिक बाल साफ किए. हालांकि ज्यादातर महिलाएं कुछ बाल रखती हैं.’

 सातवां मिथ – छोटे की अपेक्षा बड़े स्तन कम संवेदनशील होते है.

कैरोल के मुताहिक ये गलत मिथ है. साइज से कोई फर्क नहीं पड़ता.

 आठवां मिथ- सेक्स सबसे बढ़िया एक्सरसाइज है.

कैरोल कहते हैं कैलोरी जलाने के लिए ठीक है. लेकिन बहुत सारे लोग लंबी उम्र तक एक्टिव रहे. 30 मिनट के सेक्स में 85 से 250 कैलोरी जलती है और इसे सबसे बढ़िया एक्सरसाइज नहीं कहा जा सकता.

 नौवां मिथ – महिलाओं के बारे में मिथ ये है कि वे ज्यादा धोखा देती हैं.

जी नहीं, कैरोल के मुताबिक पुरुषों के बराबर ही महिलाएं धोखा देती हैं और इसमें उम्र की कोई भूमिका नहीं होती. एक अध्ययन के मुताबिक 23 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी वर्तमान रिलेशनशिप में चीट किया. वहीं, 19 प्रतिशत महिलाओं ने भी ऐसा ही किया.

 दसवां मिथ – स्वप्नदोष केवल पुरुषों को होता है.

कैरोल का जवाब ये है कि स्वप्नदोष के शिकार महिला और पुरुष दोनों ही होते हैं.